सुनील कश्यप, बस्तर- पिछले 4 दशक से बस्तर में काबिज नक्सलवाद के आतंक को खत्म करने के लिए लगातार सरकारें नई नई योजना के तहत काम करते नजर आ रही है. और छत्तीसगढ़ में हुए विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा की सरकार बनते ही बस्तर संभाग में नक्सल गतिविधियां भी तेज हो गई है. बस्तर में शांति स्थापित करने के लिए प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने नक्सलियों से वर्चुअल शांति वार्ता करने की अपील की थी. इस बातचीत के लिए नक्सली भी राजी हुए. और शांति वार्ता का समर्थन आदिवासी समाज ने भी किया है.

इधर नक्सलियों से शांति वार्ता करने की बात पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने बयान दिया है. और कहा कि नक्सल मामलों में केंद्र और राज्य सरकार के विचार अलग-अलग हैं. बस्तर में केंद्रीय गृह मंत्री अलग बयान देते हैं. और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी अलग बयान देते है. केंद्रीय मंत्री कहते हैं कि 2022 मे बस्तर को नक्सलवाद से मुक्त करेंगे. वहीं आज शांति वार्ता की बात सामने आ रही है. प्रदेश के गृह मंत्री को पहले केंद्रीय गृह मंत्री और जेपी नड्डा से पूछना चाहिए कि वे क्या चाहते हैं. भाजपा की डबल इंजन की सरकार को पहले अपने विचार को स्पष्ट करने की आवश्यकता है. क्या वे बातचीत के जरिये नक्सलवाद खत्म करेंगे या बन्दूक के बदले बंदूक से खत्म करेंगे. यह स्पष्ट होना चाहिए. आज पिछले 3 महीनों में बस्तर अशांत हुआ है. जो पिछले 5 सालों में कांग्रेस की सरकार में शांत रहा. बस्तर की जनता और बस्तर के जनप्रतिनिधि चाहते हैं कि बस्तर में शांति होनी चाहिए. यदि प्रदेश की भाजपा सरकार को नक्सलवाद से निपटने के लिए जरिया चाहिए तो वे बस्तर के कांग्रेसी जनप्रतिनिधियों से बातचीत करें. और बस्तर के लोगों से मिले. इससे समाधान होगा. और समाधान सुझाव देने के लिए कांग्रेस हमेशा तैयार है.

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