जगदलपुर (अमन दास मानिकपुरी). शहर समेत संपूर्ण बस्तर में इन दिनों तथाकथित पत्रकारों का आतंक देखने को मिल रहा है. इन तथाकथित स्वंभू पत्रकारों को प्रत्येक गांव गलियारों, राशन दुकानों, धान खरीदी केंद्रों, रेत खदानों यहां तक की समस्त विभागों में ब्लैकमेलिंग करते देखा जा सकता है. आए दिन इन तथाकथितों की शिकायतें भी थाने और जिला प्रशासन के पास पहुंच रही है. अपने आप को पत्रकार बताते हुए ये लोग किसी भी हद तक जा रहे हैं. जिसके चलते मेन स्ट्रीम मीडिया में काम करने वाले पत्रकारों को दूसरी दृष्टि से लोग देखने लगे हैं. झुंड बनाकर ये लोग धान खरीदी केंद्रों में रात में भी घुस रहे हैं. इतना ही नहीं सरपंच – सचिव से लेकर मेडिकल स्टोर चलाने वालों को भी अपना शिकार बनाते हैं. इसके अलावा किसानों को भी नहीं छोड़ रहे. अगर कोई किसान अपने खेतों में मिट्टी समतरीकरण कर रहा है तो उनसे भी जाकर पैसे उगाही कर रहे हैं. इन तथाकथित लोगों ने किसानों के मिट्टी समतलीकरण को गैर कानूनी बताते हुए पांच सौ हजार ठग लिए हैं. इन सब परिस्थितियों को देखते हुए बस्तर जिला पत्रकार संघ ने संभाग आयुक्त श्याम धावड़े और बस्तर के पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह को ज्ञापन देकर ऐसे स्वंभू पत्रकारों पर कार्रवाई करने की मांग की है. पुलिस अधीक्षक ने बस्तर जिला पत्रकार संघ को यह आश्वस्त किया है कि ऐसे पत्रकारों को चिन्हित कर इन पर कार्रवाई अवश्य की जाएगी. आयुक्त श्याम धावड़े ने भी कलेक्टरों से चर्चा कर इस पर कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है. बस्तर जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष सुरेश रावल ने बताया कि प्रतिदिन कई ऐसे मामले संज्ञान में आ रहे हैं जिससे न केवल पत्रकारिता धूमिल हो रही है अपित समाज में अच्छा मैसेज भी नहीं जा रहा. इन परिस्थितियों को देखते हुए ऐसे लोगों पर कार्रवाई अवश्य किया जाना चाहिए. प्रशासन व पुलिस का सहयोग इस मामले में संघ करता रहेगा. बता दें कि जिले भर में एंड्रॉयड फोन धारक अपने आप को पत्रकार बता कर ब्लैक मेलिंग का धंधा चला रहें हैं. इसके पास ना तो पत्रकारिता डिग्री है ना ही कभी इस फील्ड में थे. ऐसे स्वयंभू लोग अपने आप को पत्रकार बता कर गांव – गांव, राशन दुकानों, धान खरीदी केंद्रों यहां तक की मेडिकल स्टोर में भी जाकर प्रशासन से कार्रवाई करने का धमकी देते हुए ठगी कर रहे हैं. सबसे ज्यादा परेशान गावों के सरपंच सचिव है. जिन्हें निर्माण कार्यों में गुणवत्ता विहीन बताते हुए पैसे की मांग करते हैं. पैसे नहीं देने पर फर्जी मामले दर्ज करने की भी धमकी दी जाती है. ये लोग झुंड बनाकर निकलते हैं इन तथाकथित स्वयंभू पत्रकारों में कई ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो जेल से बाहर निकल कर इस फील्ड में आ गए हैं. कई तो ऐसे हैं जिन पर गंभीर और गैर जमानती धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध है, मगर पत्रकार होना बात कर वे पुलिस से बचते नजर आ रहे हैं. बस्तर जिला पत्रकार संघ ने लोगों से यह अपील भी की है कि ऐसे लोगों के झांसे में ना आए क्योंकि ये लोग निष्पक्ष पत्रकारिता नहीं करते. इन्हें केवल पैसे से मतलब होता है. जिला पत्रकार संघ ने यह भी कहा है कि ऐसे लोग जब भी ग्रामीण इलाकों में या किसी विभाग में ब्लैक मेलिंग करते देखे जाए तो फौरन इसकी सूचना नजदीकी थाना में दें साथ ही पत्रकार संघ को भी अवगत कराए ताकि ऐसे समाज विरोधी लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जा सके.

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