बीजापुर (चेतन कापेवार). राज्य युवा आयोग के पूर्व सदस्य अजय सिंह ने अपने विरूद्ध छग राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत् कार्रवाई की प्रक्रिया को दुर्भावना से प्रेरित ठहराया है. अजय ने विधायक एवं कांग्रेस से उम्मीदवार विक्रम शाह मंडावी पर प्रशासनिक शक्तियों के दुरूपयोग का आरोप लगाया है. साथ ही बीजापुर एसपी और भैरमगढ़ थाना प्रभारी पर संयुक्त रूप से न्यायालय कलेक्टर को गुमराह करने का सनसनीखेज आरोप भी है. बुधवार को आहूत पत्रवार्ता में अजय ने कांग्रेस उम्मीदवार विधायक विक्रम पर आरोपों की झड़ी लगा दी. उन पर ना सिर्फ सरकारी योजनाओं की आड़ में बेतहाशा भ्रष्टाचार करने बल्कि प्रशासन की कार्यशैली को दागदार ठहराया. अजय ने कहा कि कांग्रेस में रहते वे विधायक के भ्रष्टाचार को उजागर कर रहे थे, परिणामस्वरूप पहले उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया, तदुपरांत विधायक के इशारे पर राज्य युवा आयोग सदस्य के पद भी हटा दिया गया.

बावजूद उन्होंने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. वे लगातार विधायक और कलेक्टर के कृत्य को उजागर करते रहे.
बीते दो वर्षों में उन्होंने डीएमएफ, बस्तर प्राधिकरण मद, परियोजना मद, विधायक निधि, ग्राम पंचायत के चौदहवें-पंद्रहवें वित समेत तमाम सरकारी निधि में करप्शन के मामले जनता के सामने रखते आए हैं. जिसकी सच्चाई को जनता ने भी स्वीकारा है, जिससे बौखलाकर विधायक ने मुझ पर प्रशासन के जरिए दबाव बनाना शुरू किया. बीते वर्ष भ्रष्टाचार के विरूद्ध पहले तो धरने पर बैठने की उन्हें इजाजत नहीं दी गई और बाद में जमानतदार पेश करने के बाद भी प्रशासन ने हठधर्मिता पूर्वक कार्रवाई करते मुझे जेल भेजा.
इसके बाद भी वे नहीं रूके. देवगुड़ियों के नाम पर 3 करोड़ 49 लाख की राशि में बंदरवाट की प्लानिंग पर उन्होंने पानी फेर दिया. जिससे तिलमिलाए विधायक ने एक बार फिर पद और पावर का दुरूपयोग करते आचार संहिता के बीच मेरी सुरक्षा घटाई गई. जो पूरी तरह से गलत है.
अजय ने कहा कि अगर वे झूठ बोल रहे होते तो देवगुड़ी प्रकरण में उनके आरोपों के बाद पंचायत को वापस एजेंसी नहीं बनाते और तो और रिकवरी की कार्रवाई के लिए प्रशासन को मजबूर नहीं होना पड़ता.
उन्होंने विधायक पर स्व राजीव गांधी के सपनों पर चोट पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूरे कांग्रेस को जिस पंचायत पर अहंकार था, विधायक ने भ्रष्टाचार की नियत से उसे ही अयोग्य ठहराया. देवगुड़ी मामले में विधायक का लेटरहेड इसका प्रमाण है. अपने लेटरहेड में विधायक खुद पंचायतों के काम पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हैं. देवगुड़ियों के निर्माण के लिए पंचायतों को सक्षम ना मानते हुए सहायक आयुक्त को एजेंसी बनाने की अनुशंसा करते हैं. अजय ने कहा कि मेरे विरूद्ध राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत् कार्रवाई के तहत् मुझे अपना पक्ष रखने का अवसर मिला है और मैने अपना पक्ष भी रखा है, मैं न्यायलय के फैसला का स्वागत करता हूं, न्यायालय कलेक्टर जो फैसला करेगी मैं उस पर अमल करूंगा, लेकिन सच्चाई झुकने नहीं दूंगा, विधायक के विरूद्ध भ्रष्टाचार के जितने आरोप मैंने लगाए हैं, किंचित परिस्थितियों में पीछे हटने के बजाए निडरता के साथ आगे भी विधायक की कारास्तानियों से पर्दा उठाता रहूंगा.

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