बीजापुर (चेतन कापेवार). विधानसभा चुनाव के तारीखों का एलान और चुनाव आचार संहिता प्रभावी होने के साथ बीजापुर में सरकार के आधे-अधूरे काम मुद्दों की शक्ल ले रहे हैं. इन्हीं में शामिल है मद्देड का नवनिर्मित बस स्टैंड. जिसका लोकापर्ण बीते सितंबर माह में मुख्यमंत्री भुपेश बघेल ने किया है.

दरअसल स्थानीय लोगो के साथ विपक्ष के लिए यह चुनावी मुद्दा इसलिए बना हुआ है कि जिला खनिज संस्थान न्यास निधि (DMF) से 48.43 लाख की लागत का बस स्टैंड अब अभी अधूरा है, बावजूद बीजापुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री के लोकार्पण कार्यों की सूची में यह बस स्टैंड भी शामिल था.

_यात्री प्रतीक्षालय छोड़ अन्य काम अधूरे_

बस स्टैंड के नाम पर केवल यात्री प्रतीक्षालय भवन ही तैयार है, इसके अलावा बसों के प्रवेश और निकासी के लिए सड़क का निर्माण नही हुआ है. बसस्टैंड परिसर में प्रस्तावित शॉपिंग काम्प्लेक्स भी अधूरा है. वही प्रतीक्षालय भवन के पोर्च में लगी टाइल्स भी कई जगह उखड़ चुकी तो कई जगहों पर दरारे पड़ चुकी है. लोकार्पण के माहभर बाद भी यहां कोई यात्री बस नही रुकी. वजह अधूरा निर्माण.

आंखों में धूल झोंकने जैसा

भाजपा से उम्मीदवार पुर्व मंत्री महेश गागड़ा का कहना है कि विधायक विकास के नाम पर जनता की आंखों में किस तरह धूल झोंकते आये है, इससे साफ जाहिर होता है. विधायक ना सिर्फ जनता बल्कि चुनावी लाभ के लिए मुख्यमंत्री तक को गुमराह करने से नही चूके. मुख्यमंत्री को स्वयं इस बात को गम्भीरता से लेनी चाहिए, कि जब उनके विधायक उन्हें गुमराह कर सकते है तो जनता के साथ कैसा सलूक विधायक कर रहे होंगे.

विधायक संग प्रभारी मंत्री, कलेक्टर भी जिम्मेदार

कांग्रेस से निष्कासित युवा आयोग के पूर्व सदस्य अजय सिंह ने भी अपनी प्रतिक्रिया में विधायक के साथ बस स्टैंड की नींव रखने वाले प्रभारी मंत्री कवासी लखमा, कलेक्टर राजेंद्र कटारा पर जनता के साथ मुख्यमंत्री को गुमराह करने आरोप लगाया है. विकास के नाम भ्र्ष्टाचार का यह जीता जागता सबूत है.
बहरहाल बीजापुर का मद्देड बस स्टैंड अधूरे निर्माण के मुकाबले सीएम के हाथों लोकापर्ण से चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है. जिसे विपक्ष जोर शोर से उठाने की तैयारी में है.

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