बीजापुर (चेतन कापेवार). कांग्रेस के कद्दावर नेता एवं राज्य कृषि कल्याण बोर्ड के सदस्य बसंत राव ताटी ने वन भूमि पर अतिक्रमण मामले में जारी जांच को राजनीतिक षडयंत्र ठहराया है. बस्तर फाइल्स वेब पोर्टल से फोन पर चर्चा में ताटी ने किसी का नाम ना लेते हुए अपनी ही पार्टी के कुछ लोगों पर संहेद जताया है. ताटी के मुताबिक पहले भाजपा और अब कांग्रेस में पार्टी के अपने कुछ लोग विरोधियों से मिलकर मेरे विरूद्ध षडयंत्र कर रहे हैं. यह पूरा मामला राजनीति से प्रेरित हैं. जिस जमीन की जांच चल रही है उस पर मैं विगत 40 वर्षों से काबिज हूं. साल 2019 से पूर्व भी उक्त पांच एकड़ भूमि की जांच हो चुकी है. उस वक्त भी निर्णय मेरे पक्ष में आया था. तब के वन विभाग के एसडीओ ने नक्शा मिलान और तमाम दस्तावेजों के अवलोकन के बाद उपनिदेशक को पत्र लिखकर पट्टे को वैध ठहराया था.
ताटी का कहना है कि जब – जब चुनाव आता है जमीन प्रकरण को जबरन विवादित कराया जाता है. सामने भी विधानसभा चुनाव है, मुझे हथियार के रूप में इस्तेमाल करने, मुझ पर दबाव बनाने या फिर मेरी छबि धूमिल करने जांच के नाम पर मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है.
बफर क्षेत्र की भूमि होना बताया गया –
तीन दिन पहले ही भोपालपट्नम तहसीलदार और मद्देड़ बफर परिक्षेत्र के अफसरों के साथ राजस्व और वन विभाग के कर्मचारी जांच कर लौटे हैं. इसकी जांच प्रतिवेदन तैयार की जा रही है, जिसे अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के सुपुर्द किया जाना है. तहसीलदार भोपालपट्नम कैलाश पोयाम के अनुसार उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार टीम जांच के लिए पहुंची थी. मौके पर पहुंचकर जरूरी भौतिक सत्यापन कर पंचनामा तैयार किया जा रहा है. आगे जांच प्रतिवेदन तैयार कर एसडीएम को रिपोर्ट सौंपी जाएगी. हालांकि जांच में शिकायत सही पाई गई अथवा नहीं, इस पर जांच पूरी होने का हवाला दिया गया.
2019 से जारी है जांच
वर्ष 2019 से संबंधित भूमि की जांच चल रही है, इसी वर्ष 21 जून को उपनिदेशक टाइगर रिजर्व की तरफ से कलेक्टर बीजापुर को भोपालपट्नम तहसील अंतर्गत वनभूमि पर फर्जी पट्टों को निरस्त करने हेतु कार्रवाई के लिए पत्र व्यवहार किया गया था. पत्र में उल्लेख है कि बसंत राव ताटी द्वारा भोपालपट्नम तहसील के खसरा क्रमांक 1/15/1 में रकबा 5 एकड़ वन भूमि पर फर्जी तरीके से पट्टा जारी करवाया गया था. जबकि उक्त भूमि इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मद्देड़ बफर के वन क्रमांक ओ.ए. 1229 के अंतर्गत है. पत्र में इस बात का भी जिक्र है कि वन कक्ष क्रमांक ओ.ए. 1229 छोटे-बड़े झाड़ के जंगल है और पटवारी अभिलेख में भी इसका स्पष्ट उल्लेख है. इस आधार पर टाइगर रिजर्व पहले ही ताटी के दावे और शासकीय पट्टे को गलत ठहरा चुका है. प्रकरण में जांच तेज है , फैसला बसंत ताटी के पक्ष में आता है, यह देखने वाली बात होगी, लेकिन चुनाव से पहले जमीन विवाद से भोपालपट्नम में बसंत ताटी चर्चा में जरूर हैं.