बीजापुर (चेतन कापेवार)। मुख्यमंत्री की महत्वकांक्षी गोठान योजना जिले में धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। इसे और कोई नहीं बल्कि जिम्मेवार अफसर ही पलीता लगा रहे है। गोठानों में समूहों की आय निरंतर घट रही है, नतीजतन कार्यरत् समूह से जुड़ी महिलाएं भी योजना से नाता तोड़ रही है।
इसकी बानगी बीजापुर-भोपालपटनम नेषनल हाईवे पर से गांव मोदकपाल स्थित गोठान में देखने को मिली।

दरअसल गुरूवार को पूर्व मंत्री महेश गागड़ा के नेतृत्व में भाजपाई यहां गोठान का निरीक्षण करने पहुंचे थे।भाजपाईयों ने मौके पर पाया कि गोठान में बना बकरी शेड की टिन की छत उड़ चुकी है। योजना के तहत् जितनी कार्य गतिविधियों का संचालन किया जाना था, वो ना के बराबर थी। इतना ही नहीं गोठान की आड़ में बरसाती नाले को कागजों में डबरी तक बता दिया गया है। गोठान का संचालन कर रही सुस्मिता दुब्बा, रामबाई कोर्राम के मुताबिक पंखे-लाइट की उचित व्यवस्था नहीं होने से काफी मुर्गियां मर गई, इसी तरह बकरी पालन शेड की छत भी उड़ गई है। कोई जिम्मेदार अफसर गोठान की सुध लेने नहीं आते। जैसा सब्जबाग दिखाया गया था, वैसा ना होकर केवल स्टक्चर तैयार कर गोठान को भूला दिया गया। नतीजतन समूह की आमदनी घट गई। प्रति सदस्य की सालाना आमदनी 3 हजार तक सिमट कर रह गई है। योजना का हाल बेहाल होता देख 10 में से 4 महिलाएं पहले ही काम छोड़ चुकी है। आगे समूह के अन्य सदस्य भी गोठान से नाता तोड़ रोजी काम पर जाने का विचार कर रही है, जिसमें उन्हें आमदनी गोठान के मुकाबले कई गुना अधिक होगी।

पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने कहा कि सरकार जिस तरीके से गोठान का प्रचार कर रही है, धरातल पर उसकी हकीकत जानने वे पहुंचे थे। उन्होंने पाया कि जिस बकरी शेड की छत उड़ चुकी है, उसकी दीवारों पर निर्माण लागत , एजेंसी इत्यादि का ब्योरा तक नहीं लिखा गया है। समूह की महिलाओं की आमदनी न्यूनतम से न्यूनतम रह गई है। उन्हें कोई आर्थिक लाभ नहीं हो रहा है। केवल और केवल गोठान भ्रष्टाचार करने का अड्डा बनकर रह गया है।

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