सुनील कश्यप, जगदलपुर। बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले और तेलांगना राज्य के सीमा में सुरक्षाबल के जवानों के बीच मुठभेड़ हुई है। इस मुठभेड़ में जवानों को बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षाबल के जवानों ने मोस्ट वांटेड नक्सली लीडर हिड़मा को मार गिराया है। मारे गए नक्सली पर 45 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बीजापुर और तेलांगना राज्य के सीमावर्ती इलाके में तेलांगना ग्रेयहोउंड्स और सीआरपीएफ कोबरा बटालियन की एक संयुक्त टीम के द्वारा एक जॉइंट ऑपेरशन चलाया गया था। जॉइंट ऑपेरशन के दौरान जवानों की टीम का सामना छत्तीसगढ़ के मोस्ट वांटेड और नक्सलियों के सेंट्रल कमिटी के मेंबर हिड़मा के साथ हो गया। इसके बाद जवानों और नक्सलियों के बीच ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। इसी फायरिंग के दौरान जवानों ने एक नक्सली को मार गिराया। जवानों को भारी पड़ता देख नक्सली मौके से फरार हो गए। इसके बाद जवानों ने घटनास्थल में सर्च ऑपरेशन चलाया। जिसमें जवानों ने मौके पर एक नक्सली का शव बरामद किया। जिसकी शिनाख्त मोस्ट वांटेड नक्सली लीडर मड़ावी हिड़मा के रूप में हुई है। हालांकि इस मामले भी आधिकारिक पुष्टि बस्तर पुलिस ने नहीं की है।
बता दें कि, 43 वर्षीय मड़ावी हिड़मा नक्सलियों के सेंट्रल कमिटी का मेंबर था। दंडकारण्य में हिड़मा ने सुरक्षाबलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया था। हिड़मा ने सुरक्षाबल के कई जवानों की हत्या की है। पिछले एक दशक से दंडकारण्य में हिड़मा के नाम की दहशत थी। हिड़मा दक्षिण बस्तर के सुकमा जिले के पूर्वर्ती गांव का निवासी था। वर्ष 1996 – 97 में 17 साल की उम्र में ही नक्सली संगठन में शामिल हो गया था। हिड़मा को हिदमल्लू और संतोष के नाम से जाना जाता था। हिड़मा पीएलजीए (पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) नक्सलियों के आर्म्ड विंग का लीडर था। हिड़मा ने 7 कक्षा तक ही पढ़ाई की थी। हिड़मा के ही निशानदेही पर ही सुरक्षाबल के कई जवान शहीद हो गए। हिड़मा के ही बनाये गए एम्बुश में फंसकर 2007 में उरपाल में 24 जवान शहीद हो गए थे। 2011 में ताड़मेटला में 76 जवान शहीद हुए थे। और बीते वर्ष 2017 में 12 जवान शहीद हो गए थे। मारे गए नक्सली लीडर हिड़मा पर 45 लाख रुपये का इनाम घोषित था।