सुनील कश्यप, सुकमा। नक्सल प्रभावित क्षेत्र सुकमा जिले में गर्मी के मौसम में भीषण गर्मी की मार जिलेवासियों को झेलना पड़ता है। जिलेवासियों के साथ ही जंगली व पालतू जानवरों पर भी भीषण गर्मी का असर देखने को मिलता है। इसके अलावा भीषण गर्मी के चलते जंगल के नदी नाले भी सूखने की कगार पर आ जाती है। जिसके कारण जंगली और पालतू जानवर पीने के पानी के लिए तरसते हैं और मुख्य मार्ग की ओर निकल पड़ते हैं। मुख्य सड़क में आने के चलते जानवर दुर्घटना का शिकार भी हो जाते हैं।
सीआरपीएफ के अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि जानवरों की परेशानियों को देखते हुए ग्रामीणों ने बस्तरिया बटालियन सीआरपीएफ के अधिकारियों से जानवरों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था कराने की मांग की थी। ग्रामीणों की मांग को देखते हुए जवानों की सहायता से कैम्प के परिधि में जानवरों के लिए पानी टंकी का निर्माण सीआरपीएफ बस्तरिया बटालियन के द्वारा करवाया गया। जिसमें प्रतिदिन पानी भरवाया जाता है। पानी से भरी टंकी को जानवर वहां पहुंचकर अपनी प्यास बुझाते हैं। इतना ही नहीं रात्रि के वक्त जंगली जानवर भी कैंप के नजदीक बने टंकी में पहुंचकर अपनी प्यास बुझाते हैं।