चेतन कापेवार, बीजापुर। प्रकृति की गोद में रहने वाले बस्तर के आदिवासी भाई-बहन अपने रीति -रिवाजों, परम्पराओं और अनूठी संस्कृति के धनी हैं। खेती-किसानी और वनोपज संग्रहण के जरिये जीवन -यापन करने के साथ ही अब शिक्षा के द्वारा समाज को विकास की दिशा में निरंतर अग्रसर कर रहे हैं। इस ओर हमें लगातार ध्यान केन्द्रीत करना होगा तथा वनांचल में शिक्षा के उजियारा को फैलाना होगा। जिससे समाज के लोग जागरूक होने के साथ समाज के विकास को एक नई दिशा प्रदान कर सकें। यह बात प्रदेश के आबकारी एवं उद्योग मंत्री तथा प्रभारी मंत्री कवासी लखमा ने बीजापुर नगर के समीप मूसालूर में आयोजित संभागीय गोंडवाना सम्मेलन के समापन के अवसर पर समाज के पदाधिकारियों एवं सदस्यों को सम्बोधित करते हुए कही।

प्रभारी मंत्री कवासी लखमा ने इस अवसर पर राज्य शासन द्वारा आदिवासी हितों के लिए संचालित योजनाओं -कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासियों के कल्याण के प्रतिकृत संकल्पित है। उन्होंने आदिवासी समाज के लोगों को शिक्षा के लिए निरंतर आगे आने पर जोर देते हुए पुरातन प्रथाओं में सुधार और व्यसनों को त्याग करने का सुझाव दिया। इस मौके पर विधायक केशकाल एवं उपाध्यक्ष बस्तर विकास प्राधिकरण संतराम नेताम ने संभागीय गोंडवाना महासभा के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को समाज की सेवा करने हेतु शपथ दिलाया और उन्हे बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस मौके पर समाज के संभागीय महासचिव सदेसिंह कोमरे ने सम्भागीय सम्मेलन का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। आरंभ में समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों द्वारा लोक नृत्य एवं बाजे-गाजे के साथ अतिथियों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। वहीं अतिथियों ने क्षेत्र के देवी-देवताओं तथा देव विग्रहों की पूजा-अर्चना कर समाज के खुशहाली एवं समृद्धि का आर्शीवाद मांगा। इस मौके पर क्षेत्रीय विधायक एवं उपाध्यक्ष बस्तर विकास प्राधिकरण विक्रम मंडावी, पूर्व सांसद एवं समाज के प्रदेश पदाधिकारी सोहन पोटाई, गोंडवाना समाज के प्रदेश पदाधिकारीगण, समाज के नव निर्वाचित संभागीय अध्यक्ष श्री सुमेर सिंह नाग, समाज के सभी जिलों के जिला अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में समाज के सदस्य उपस्थित थे।

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