बस्तर- छत्तीसगढ़ के बस्तर में 24, 25 और 26 सितंबर को आई बाढ़ ने जमकर नदी तटीय इलाकों में तबाही मचाई. भारी बारिश और बाढ़ की वजह से सैकड़ो लोगों के आशियाने ढह गए. चार दिनों तक टापू में रात गुजारना पड़ा. घर में रखा सामान, राशन सामग्री, जरूरतमंद की सामग्रियां और घर में मौजूद मवेशी भी बाढ़ में बह गए. पूरा इलाका बाढ़ की वजह से तहस-नहस हो गया. भारी बारिश और बाढ़ ने इस कदर तबाही मचाई की लोगों के मन में आज भी बाढ़ का डर बसा हुआ है. बाढ़ के ख़ौफ़ ने ग्रामीणों को आज जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय जगदलपुर खींच लाया है. बाढ़ प्रभावित लोगों ने उन्हें विस्थापित करने करने की मांग की है. सैकड़ो की संख्या में जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों के चेहरे पर बाढ़ का डर साफ तौर पर देखा जा सकता है.
बाढ़ प्रभावित लोगों ने बताया कि बीते दिनों आई बाढ़ की वजह से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. घर और उसमें रखा सामान तबाह हो गया. और एक बार फिर अर्नब चक्रवात के कारण यह चेतावनी दी गई है कि 26, 27 और 28 अक्टूबर को तेज आंधी तूफान के साथ बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ इलाके में मूसलाधार बारिश होगी. बारिश की वजह से बाढ़ की स्थिति निर्मित होगी. और नदी तटीय इलाकों में बसे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतनी की अपील और उचित दिशा निर्देश जिला प्रशासन ने जारी कर दी गई है. जिससे बाढ़ प्रभावित गांव भेजापदर के लोगों में डर बस गया है. सभी यह मांग कर रहे हैं कि जिला प्रशासन उन्हें उनके गांव से विस्थापित करके नई जगह पर विस्थापित करें. ताकि आगामी दिनों में किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो और ना ही उनका घर टूटे, और लोगों की जान बचाई जा सके. क्योंकि साल 2026 में जिस तरह बाढ़ आई थी, जैसे-तैसे सभी ने मिलकर एक दूसरे की जिंदगी को बचाया है. सही समय पर निर्णय लेकर उचित स्थान में नहीं जाते तो कई लोग बाढ़ की चपेट में आ जाते और उनकी मौत भी हो सकती थी.
लोगों ने बताया कि गांव में एक पहाड़ जैसा इलाका है, जिसमें गांव के सभी लोग इकट्ठे हुए और उस पहाड़ के चारों दिशाओं में लगभग 10 किलोमीटर तक बाढ़ का पानी भरा हुआ था. इसी टापू में चार दिन लोगों ने गुजर बसर किया है. जिला प्रशासन ने लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने का कार्य जरूर किया है. बाढ़ की वजह से 170 मकान पूरी तरह ढह गए. इस भेजापदर गांव में करीब 1400 की जनसंख्या है. ग्रामीण यह भी कहते हैं कि यदि उन्हें वहां से विस्थापित नहीं किया जाता है तो, आने वाले दिनों में और भी इस तरह बाढ़ आने की संभावना है. जिससे अगली पीढ़ी को काफी नुकसान होगा. ऐसी बाढ़ में वह संभल नहीं पाएंगे.

प्रभावित लोगो ने बताया कि इस मामले को लेकर अपर कलेक्टर से बातचीत की गई. जिन्होंने बताया कि 26, 27 और 28 अक्टूबर को तूफान आने वाला है. इसके बाद अगले सप्ताह ग्रामीण और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ एक बैठक आयोजित की जाएगी. जिसमें विस्थापन का निर्णय लिया जाएगा. इससे पहले भी आवेदन दिया गया था. लेकिन बाढ़ का विकराल रूप देखने को नहीं मिला था. इस बार देखें हैं इसीलिए डर लोगों में बसा हुआ है. ग्रामीणों ने अपने आप को विस्थापित करने के लिए चोकावाड़ा गांव का चयन किया है. और अपनी बातें जिला प्रशासन तक रखी है. अब आगे इसमें जिला प्रशासन उचित निर्णय लेगी.