जगदलपुर (डेस्क) – अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले आज से जगदलपुर के मंडी परिसर में तीन दिवसीय जिला स्तरीय ‘कलम बंद-काम बंद’ आंदोलन और धरना-प्रदर्शन की शुरुआत हो गई है. जिले के हजारों कर्मचारी अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर काम छोड़कर प्रदर्शन में शामिल हुए हैं.
प्रमुख मांगें और ‘मोदी की गारंटी’ की याद
आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार ने चुनाव से पूर्व कई वादे किए थे, जिन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया है. उनकी मुख्य मांगों में शामिल हैं:
महंगाई भत्ता (DA) : केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता और एरियर्स का भुगतान.
पिंगुआ कमिटी की रिपोर्ट : लिपिकों, शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों की वेतन विसंगति दूर करने हेतु गठित कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करना.
नियमतिकरण : प्रदेश में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी, संविदा और अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण.
पेंशन और अन्य लाभ : 300 दिनों का अर्जित अवकाश नगदीकरण और अन्य राज्यों की तर्ज पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा.
मंडी परिसर में जुटा जनसैलाब
आज सुबह से ही बस्तर संभाग के विभिन्न विभागों के कर्मचारी और अधिकारी मंडी परिसर में जुटने शुरू हो गए थे. फेडरेशन के नेताओं ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की “अनिश्चितता” के कारण कर्मचारियों में भारी आक्रोश है. 29 दिसंबर से शुरू हुआ यह प्रदर्शन 31 दिसंबर तक चलेगा.
अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
फेडरेशन के जिला संयोजक गजेंद्र श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि यह केवल चेतावनी है. यदि 31 दिसंबर तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो आने वाले समय में प्रदेश व्यापी अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा.
आम जनता पर असर
इस ‘काम बंद’ आंदोलन के कारण कलेक्ट्रेट, तहसील और अन्य सरकारी कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा. जाति प्रमाण पत्र, राजस्व मामले और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए पहुंचे आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.