सुकमा (नवीन कश्यप) – माओवाद के गढ़ कहे जाने वाले दण्डकारण्य इलाके में प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है. छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर सक्रिय 22 खूंखार माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर ओडिशा पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. सरेंडर करने वालों में संगठन की धारदार रणनीति बनाने वाली महिला कमांडर और कई इनामी कैडर शामिल हैं.
हथियारों का जखीरा भी सौंपा

मंगलवार को ओडिशा डीजीपी के सामने हुए इस सामूहिक आत्मसमर्पण में नक्सलियों ने केवल हथियार ही नहीं डाले, बल्कि संगठन की कमर तोड़ दी है. नक्सलियों ने सरेंडर के दौरान 9 घातक हथियार पुलिस को सौंपे, जिनमें 1 AK-47 राइफल, 2 इंसास (INSAS) राइफल, 1 SLR राइफल, 3 .303 राइफलें, 2 सिंगल शॉट राइफल शामिल है. इन हथियारों के अलावा भारी मात्रा में विस्फोटक, IED और कारतूस भी बरामद किए गए हैं.
कौन है ये सरेंडर करने वाले नक्सली ?
सरेंडर करने वाले अधिकांश नक्सली दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) की महत्वपूर्ण इकाइयों जैसे केरलापाल एसी, जारगुंडा एसी, प्लाटून-26 और प्लाटून-31 से जुड़े थे. इनमें डिवीजनल कमेटी मेंबर (DVCM) रैंक की लिंगे उर्फ मुये मड़काम शामिल है, जो सुकमा जिले की निवासी है. उसके साथ ही 6 एरिया कमेटी मेंबर (ACM) ने भी सरेंडर किया है. इन 22 नक्सलियों और उनके हथियारों पर कुल 1 करोड़ 84 लाख 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था.
क्यों टूट रहा है संगठन ?
सरेंडर करने वाले कैडरों ने बताया कि वे संगठन की खोखली विचारधारा, वरिष्ठ नेताओं के भेदभावपूर्ण व्यवहार और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव से तंग आ चुके थे. बस्तर के सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों से ताल्लुक रखने वाले ये कैडर अब अपने गांव और परिवार के साथ सामान्य जीवन जीना चाहते हैं.
सरकार देगी नया जीवन (पुनर्वास नीति)
ओडिशा सरकार ने इन सभी को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए बड़ा ऐलान किया है:
● तत्काल सहायता : सभी को 25-25 हजार रुपये की अंतरिम राहत राशि दी गई.
● मासिक वजीफा : अगले 3 साल तक 10,000 रुपये प्रति माह का स्टाइपेंड.
● आवास और शिक्षा : अंत्योदय गृह योजना के तहत पक्का घर और मुफ्त कौशल विकास प्रशिक्षण.
● शादी के लिए मदद : अविवाहित कैडरों को विवाह के लिए 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि.
● राशन और इलाज : मुफ्त स्वास्थ्य कार्ड और सरकारी योजना के तहत मुफ्त राशन की सुविधा.
डीजीपी ओड़िसा की अपील
इस मौके पर ओडिशा पुलिस के महानिदेशक ने अन्य माओवादियों से भी अपील की है कि वे जंगलों में भटकने और हिंसा करने के बजाय सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं और सम्मानजनक जीवन की शुरुआत करें.