जगदलपुर (डेस्क) – केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज शनिवार को बस्तर के अपने ऐतिहासिक दौरे पर क्षेत्र को 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने का स्पष्ट और दृढ़ संकल्प लिया. मां दंतेश्वरी की धरती से किए गए इस प्रण के साथ, अमित शाह ने बस्तर को विकास, सांस्कृतिक गौरव और स्वदेशी की भावना से जोड़ने का एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया.
मां दंतेश्वरी का आशीर्वाद और मुरिया दरबार में संवाद

अपने दौरे की शुरुआत करते हुए, अमित शाह ने सबसे पहले मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना की और माता से बस्तर को ‘लाल आतंक’ से मुक्ति दिलाने का आशीर्वाद मांगा. इसके बाद, उन्होंने बस्तर की सदियों पुरानी लोकतांत्रिक परंपरा, मुरिया दरबार में शिरकत की.

यहां गृह मंत्री ने परंपरा के अनुसार सभी ग्राम प्रमुखों (मांझी-चालकी) से मुलाकात की, उनकी समस्याओं को सुना और तत्काल निराकरण के निर्देश दिए. अमित शाह ने मुरिया दरबार को “लोकतंत्र की जड़ों का उदाहरण” बताते हुए कहा कि 1874 से चली आ रही यह संवाद परंपरा ही बस्तर की असली शक्ति है. उन्होंने आदिवासी जनप्रतिनिधियों के साथ भोजन भी किया.

नक्सलवाद पर कड़ा रुख और अंतिम चेतावनी
ऐतिहासिक लालबाग मैदान में अपने संबोधन में, अमित शाह ने नक्सलवाद पर केंद्र सरकार की शून्य-सहिष्णुता नीति को दोहराया. उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य बस्तर को हमेशा के लिए शांत और सुरक्षित बनाना है.
नक्सल मुक्ति का लक्ष्य
अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं मां दंतेश्वरी से प्रार्थना करके आया हूं कि 31 मार्च 2026 तक बस्तर पूरी तरह नक्सल मुक्त हो. हमारे जवानों को इतनी शक्ति दें कि वे इस लाल आतंक को हमेशा के लिए समाप्त करें.”
आत्मसमर्पण पर जोर
उन्होंने गुमराह युवाओं से मुख्यधारा में लौटने की अपील करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की सरेंडर पॉलिसी देश में सबसे बेहतर है. उन्होंने बताया कि पिछले एक माह में ही 500 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है.
विकास का प्रोत्साहन
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को विकास से जोड़ने के लिए शाह ने बड़ी घोषणा की— जो गांव नक्सल मुक्त होंगे, उन्हें विकास के लिए एक करोड़ रुपए दिए जाएंगे.
विकास की बड़ी सौगातें और स्वदेशी अभियान
गृह मंत्री ने बस्तर में विकास कार्यों की गति तेज करने के लिए कई योजनाओं को हरी झंडी दिखाई.

कनेक्टिविटी को बढ़ावा : उन्होंने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत 36 बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस कदम से ढाई सौ से अधिक गांव अब सीधे मुख्यालय से जुड़ सकेंगे.
आधारभूत सुविधाएं : अमित शाह ने दावा किया कि बस्तर विकास के मार्ग पर मजबूती से बढ़ रहा है, जहां हर घर में बिजली, शौचालय, पीने का पानी, स्वास्थ्य बीमा और राशन जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच चुकी हैं.
स्वदेशी मेला और आत्मनिर्भरता : उन्होंने लालबाग में चल रहे बस्तर दशहरा महोत्सव के स्वदेशी मेले का भी अवलोकन किया, जिसमें इस बार 300 स्वदेशी कंपनियों ने भाग लिया. उन्होंने व्यापारियों से सिर्फ भारत में बने उत्पाद बेचने का संकल्प लेने का आह्वान किया, जो आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूत करेगा.
सांस्कृतिक गौरव और आदिवासी सम्मान
गृह मंत्री ने बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नमन किया.

विश्व का सबसे बड़ा उत्सव : उन्होंने 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरा को विश्व का सबसे बड़ा उत्सव और बस्तर की सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि माता दंतेश्वरी का रथ बनाना भगवान जगन्नाथ के रथ से भी अधिक कठिन है.
आदिवासी गौरव : उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने आदिवासी समाज के सम्मान के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं, जिसमें पहली बार एक आदिवासी बेटी, द्रौपदी मुर्मू को देश का राष्ट्रपति बनाया गया.
योजनाओं की सौगात : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंच से महतारी वंदन योजना की 20वीं किस्त के रूप में 607 करोड़ रुपये की राशि जारी की. इसके अलावा, नक्सली हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए 15 हजार प्रधानमंत्री आवास दिए जा रहे हैं.
अंत में, गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 10 साल में छत्तीसगढ़ के विकास के लिए 4 लाख 40 हजार करोड़ रुपये दिए हैं, और यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य और लघु उद्योग के क्षेत्र में बस्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी. बस्तर से उनकी विदाई, नक्सलवाद समाप्ति की एक ठोस तिथि, और विकास एवं सांस्कृतिक सम्मान के एक नए रोडमैप का संदेश छोड़ गई.