जगदलपुर (डेस्क) – बस्तर में 04 दशक से काबिज माओवादियों ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सशस्त्र संघर्ष को अस्थायी रूप से रोकने और शांति वार्ता के लिए सरकार से संपर्क करने का फैसला किया है. बीते 15 अगस्त, 2025 को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में, सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय कमेटी के प्रवक्ता अभय ने कहा कि पार्टी ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया है. यह प्रेस नोट मीडिया तक माओवादियों ने मेमोरी कार्ड( चिप) के जरिये भेजा था. माओवादियों में यह प्रेस नोट पहली दफा खुद की फ़ोटो डालकर जारी की है.

शांति वार्ता की पहल और टकराव 

​विज्ञप्ति के अनुसार, माओवादियों ने मार्च 2025 से ही सरकार के साथ शांति वार्ता की कोशिशें शुरू कर दी थीं. उन्होंने अपने सर्वोच्च नेतृत्व से सलाह-मशविरा करने के लिए एक महीने के सीजफायर का प्रस्ताव भी रखा था. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि “घेराव और उन्मूलन” अभियान तेज कर दिए. इस दौरान 21 मई को हुए एक सैन्य हमले में, माओवादी नेता कामरेड बसवाराजू सहित 28 लोग मारे गए.

जनसंघर्ष पर जोर और भविष्य की रणनीति

​इस घटना के बाद, माओवादियों ने अपने रुख में बदलाव करते हुए कहा कि वे भविष्य में जन समस्याओं को सुलझाने के लिए जनसंघर्षों पर ध्यान केंद्रित करेंगे. पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वे तमाम राजनीतिक पार्टियों और अन्य संघर्षशील संगठनों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं.

सरकार से रखी ये शर्तें

​प्रेस विज्ञप्ति में माओवादियों ने केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से अपील करते हुए कुछ महत्वपूर्ण शर्तें रखी हैं:

सीजफायर : वे सरकार से औपचारिक रूप से एक महीने के सीजफायर की घोषणा करने की मांग करते हैं ताकि वे अपने सभी कैडरों और जेल में बंद साथियों से सलाह-मशविरा कर सकें.

वार्ता का माध्यम : वे गृहमंत्री या उनके प्रतिनिधियों के साथ वीडियो कॉल के जरिए शुरुआती बातचीत के लिए भी तैयार हैं.

सूचना का प्रचार : पार्टी ने सरकार से अनुरोध किया है कि उनके इस निर्णय को आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से देश भर में प्रसारित किया जाए, ताकि यह जानकारी उन तक भी पहुंचे जो इंटरनेट से दूर हैं.

माओवादियों के ​प्रवक्ता अभय ने देश के तमाम मजदूरों, किसानों, आदिवासियों, दलितों और बुद्धिजीवियों से अपील की है कि वे इस शांति प्रक्रिया में उनका सहयोग करें. उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी नई रणनीति पर पार्टी के भीतर से आने वाली असहमति या सुझावों का स्वागत करेंगे.

इधर माओवादियों के प्रेस नोट को लेकर बस्तर पुलिस ने फिलहाल किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed