सुकमा (डेस्क) – कभी नक्सली हिंसा और भय से सहमे रहने वाला यह इलाका आज तिरंगे के रंग में डूबा हुआ था. जहां कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी, वहां आज भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारे गूंज रहे थे. राष्ट्रव्यापी “हर घर तिरंगा” अभियान के तहत सीआरपीएफ 74 वीं बटालियन ने कमांडेंट हिमांशु पांडे के नेतृत्व में 74 वाहिनी मुख्यालय से पूरे दोरनापाल नगर तक भव्य बाईक रैली निकाली.

सड़कें आज युद्ध के लिए नहीं, जश्न के लिए तैयार थीं. हवा में लहराते सैकड़ों तिरंगे और गर्व से भरे चेहरों ने माहौल को उम्मीद और एकता से भर दिया. रास्ते के दोनों ओर खड़े बच्चे तिरंगा लहराकर जवानों का स्वागत कर रहे थे, वहीं बुजुर्ग आंखों में चमक और गर्व भरी मुस्कान के साथ यह दृश्य देख रहे थे.

रैली जब गांव – गांव और शहर के प्रमुख मार्गों से गुज़री, तो तिरंगे के रंग में रंगी गलियां मानो आजादी के मेले में बदल गईं. स्थानीय स्कूलों के छात्र, गांव के बुजुर्ग और युवा तिरंगा थामे कंधे से कंधा मिलाकर इस जुलूस का हिस्सा बने. नवीन कन्या आश्रम दोरनापाल के बच्चों को तिरंगे बांटते हुए कमांडेंट हिमांशु पांडे ने कहा,
“तिरंगा सिर्फ कपड़ा नहीं, यह हमारी शहादत, संघर्ष और अस्तित्व का प्रतीक है. नक्सल हिंसा से मुक्त भविष्य के लिए इसे हर घर, हर दिल में फहराना जरूरी है.”

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों पर तिरंगा फहराकर और सोशल मीडिया पर #HarGharTiranga तथा SelfieWithTiranga के जरिए देशभक्ति का यह संदेश दूर-दूर तक पहुंचाएं.

आज नक्सल प्रभावित सुकमा की हवाओं में डर नहीं, बल्कि आजादी की महक घुली थी. तिरंगा थामे हर चेहरा कह रहा था — यह हमारा घर है, यह हमारा देश है, और यह तिरंगा हमेशा यहां लहराएगा.

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