ग्राउंड रिपोर्ट : नक्सलियों के प्रभाव में था ये गांव, फ़ोर्स तैनात हुई तो मतदान हुआ मुमकिन

बीजापुर (चेतन कापेवार). प्रदेश की 11 में से एक बस्तर लोकसभा सीट पर 19 अप्रैल को होने जा रहे मतदान में बीजापुर के पालनार गांव में भी इस बार वोटिंग होगी. पालनार के अलावा पांच और मतदान केंद्र हैं, जहां लंबे अंतराल के बाद लोकसभा चुनाव के लिए मतदान की तैयारी है, लेकिन इन इलाकों में मतदान को लेकर चर्चा है और ना ही मतदाताओं को तारीख की जानकारी.

एक ओर जिला मुख्यालय में मतदाता जागरूकता के नाम पर प्रशासन स्वीप कार्यक्रम के तहत रैली – नुक्कड़ सभाओं के अलावा पाम्पलेट-पोस्टर के जरिए प्रचार-प्रसार भरपूर कर रहा है, इसके उलट जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दूर पालनार गांव, जहां 2013 विधानसभा चुनाव के बाद वोटिंग नहीं हो रही थी , अब 2024 लोकसभा चुनाव में यहां मतदान होना है, यहां के वोटरों मे मतदान पर्ची का वितरण तो दूर मतदाताओं को चुनाव की तारीख तक नहीं मालूम. पक्की सड़क के सहारे पहले चेरपाल फिर कच्ची सड़क से होकर पालनार गांव पहुंचा जा सकता है. सलवा जुडूम के दौर में दूसरे गांवों की तरह यह गांव भी वीरान हो गया था. नक्सलियों के भय से लोग पलायन कर गए थे. हालात अब सम्हल नजर आ रहे हैं. गांव अब फिर से बस रहा हैं. कच्ची सड़क के दोनों ओर थोड़ी थोड़ी दूरी ग्रामीणों के मकान नजर आते है. गांव में आंगनबाड़ी के अलावा स्कूल की पक्की इमारत भी बन चुकी है.
गांव की चौकसी कर रहे केंद्रीय रिजर्व बल के जवानों ने बताया कि 19 अप्रैल को इसी इमारत में ही वोटिंग होगी. स्कूल के ठीक सामने दो से तीन मकान है. ठीक एक मकान के सामने चारपाई पर एक शख्स बैठा मिला, जो टीबी की बीमारी से ग्रसित था, इनसे बातचाती के साथ कुछ महिलाएं और एक युवा से भी बातचीत हुई, जो गुजर – बसर के लिए प्रायः बीजापुर में रहता है. कुछ ने बताया कि उनके पास मतदाता परिचय पत्र नहीं है, लेकिन आधार और राशन कार्ड है, पूछने पर कि गांव में वोटिंग होने वाली है, इसकी जानकारी है, ग्रामीण निरूत्तर थे. ग्रामीणों के मुताबिक मतदान की तारीख उन्हें नहीं मालूम, ये भी पता कि घर के ठीक सामने वाले स्कूल में वोटिंग होगी. कोई भी शख्स इसकी जानकारी देने गांव नहीं आया. आपने बताया तो हमें बता चला. मतदान की तारीख पर अनभिज्ञता जता रहे पालनार स्कूल के नजदीक रहने वाले ग्रामीणों में मतदान को लेकर कोई उत्सूकता नजर नहीं आई. भला यह भी कैसे संभव जब इन्हें लोकसभा और लोकसभा चुनाव जैसे शब्दों के मायने ही नहीं पता. इतना ही इस वक्त गांव में लोग भी कम हैं, अधिकतर ग्रामीण मिर्च की खेतों में मजदूरी करने पड़ोसी राज्य तेलंगाना गए हैं. हालांकि गांव की समस्याओं पर ग्रामीण चुप नहीं थे. शिकायत है कि हैंडपंप से निकलने वाला पानी दूषित है, विकल्प नहीं हैं, मजबूरी में पी रहे हैं. बिजली नहीं हैं, कई सोलर प्लेट अब काम नहीं करतें, अस्पताल गांव से दूर हैं, राशन के लिए भी लंबा सफर तय करते हैं.

वैसे तो पालनार गांव कल तक माओवादियों के प्रभाव में थे, लेकिन कुछ माह पूर्व ही यहां केंद्रीय रिजर्व बल की एक टुकड़ी को तैनात किया गया है. कैम्प स्थापित होते के बाद हालात में धीरे – धीरे सुधर रहे हैं और सुरक्षा के मद्देनजर ही एक दशक बाद यहां मतदान की तैयारी है, लेकिन सवाल यही कि जब मतदाताओं को तारीख ही नहीं मालूम तो मतदान कौन करेगा ?

महिला वोटर्स ज्यादा

2014 में पालनार मतदान केंद्र चेरपाल में शिफट हुआ. 2018 विधानसभा, 2019 लोकसभा और 2023 विधानसभा चुनाव चेरपाल से ही संपन्न हुआ. पोलिंग बूथ पर मतदाताओं की कुल संख्या 611 है, इनमें 260 पुरूष और 351 महिला वोटर्स है.

क्या कहते है अधिकारी

इस मामले को लेकर उप निर्वाचन अधिकारी एन. गवेल ने कहा कि 2013 के बाद पालनार में इस बार मतदान होगा, मतदाताओं से संपर्क स्थापित करने, जरूरी प्रक्रिया के निष्पादन के लिए सेक्टर प्रभारी तैनात है, ग्रामीण अगर अनभिज्ञता जाहिर कर रहे हैं तो तत्काल में संज्ञान में लिया जा रहा हैं.

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