जगदलपुर (अमन दास मानिकपुरी). प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही सभी राजनीतिक दल पूरी तरह से सक्रिय हो गए है. राजनीतिक दलों के द्वारा एक दूसरे पर आरोप लगाना भी अब शुरू हो चुका है. इसी क्रम में आज शुक्रवार को कांग्रेस ने नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण, आरक्षण और अन्य मुद्दों को लेकर भाजपा पर जमकर हमला बोला है.
अखिल भारतीय कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश लिलोटिया ने आयोजित पत्रवार्ता में भाजपा पर कई आरोप लगाए. राजेश लिलोटिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने सर्व समाज के हित में राज्य के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, ओबीसी और अनारक्षित वर्ग के गरीबों के हित में आरक्षण संशोधन विधेयक विधानसभा में पारित करवा कर राजभवन भेजा है. दुर्भाग्य की बात है कि भाजपा की साजिशों की वजह से आरक्षण विधेयक कानून का रूप नही ले पा रहा है. उन्होंने कहा कि बीते 9 महीनों से आरक्षण संशोधन विधेयक राजभवन में अटका हुआ है. प्रदेश में चुनावी दौरे पर भाजपा के बड़े बड़े नेता प्रधानमंत्री, भाजपा के अध्यक्ष से लेकर केंद्रीय मंत्री तक यहां आ रहे है, लेकिन राजभवन में रुके हुए आरक्षण बिल पर सभी मौन है. भाजपा के आरक्षण विरोधी रवैये को कांग्रेस पार्टी जनता के बीच लेकर जाएगी. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा आरक्षित वर्ग के गरीबों के हितों में बाधक बनी हुई है. उन्होंने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने सर्व समाज को आरक्षण देने का अपना काम पूरी ईमानदारी से किया है. इस विधेयक में अनुसूचित जनजाति के लिए 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के लिए 13 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है. इसके साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को भी 4 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है. उन्होंने कहा कि इस विधेयक को विधानसभा ने सर्वसम्मति से पारित किया है, इसको रोकना जनमत का अपमान है.
अखिल भारतीय कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बस्तर आकर एक बार फिर से झूठ बोला है कि नगरनार स्टील प्लांट को उनकी सरकार निजीकरण नही कर रही है. जबकि मोदी सरकार ने नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार नगरनार स्टील प्लांट को बेचना चाहती है, इस प्लांट को खरीदने के लिए उद्योगपतियों ने सर्वे भी शुरू कर दिया है. उद्योगपतियों को बोली लगाने के लिए नियम और शर्तें भी मोदी सरकार ने बना दिया है. राजेश लिलोटिया ने कहा कि मीडिया की खबरों के मुताबिक नगरनार स्टील प्लांट को खरीदने के लिए पांच निजी कंपनियों ने अपना प्रस्ताव प्रस्तुत किया है. उनमें से प्रमुख जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड, जेएसडब्ल्यू एस्सार और अडानी समूह शामिल है. उन्होंने कहा कि एनएमडीसी के चेयरमैन अमिताभ मुखर्जी ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया था कि एनएमडीसी स्टील प्लांट के विनिवेशक की प्रक्रिया में प्लांट की कमिशनिंग के बाद तेजी आएगी. भारत सरकार द्वारा इसी वित्तीय वर्ष 31 मार्च 2024 के पहले नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण करने का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. मोदी सरकार के द्वारा नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण करने का निर्णय लिया गया है, और प्लांट की निजीकरण करने की प्रक्रिया अंतिम चरण तक पहुंच गई है. उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और भाजपा के नेता छत्तीसगढ़ में आकर लगातार झूठ बोलकर जाते है कि छत्तीसगढ़ में धान खरीदी केंद्र सरकार करती है. बल्कि राज्य सरकार धान खरीदी मार्कफेड के माध्यम से खुद करती है. इसके लिए मार्कफेड विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेती है और इस ऋण के लिए बैंक गारन्टी राज्य सरकार देती है. खरीदी में जो घाटा होता है उसको भी राज्य सरकार वहन करती है. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार घोषित समर्थन मूल्य से 1 रुपये भी ज्यादा कीमत देने पर राज्य सरकार को राज्य से केंद्रीय योजनाओं के लिए लगने वाले चावल को नही खरीदने की धमकी देती है. उन्होंने कहा कि देश में छत्तीसगढ़ अकेली ऐसी सरकार है जो अपने धान उत्पादक किसानों को सबसे ज्यादा कीमत देती है. पिछले साल छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के किसानों को धान की कीमत 2640 रुपये दिया है. उत्तरप्रदेश, गुजरात जैसे प्रदेशों में तो किसानों को धान का मूल्य 1100 रुपये ही मिलता है. छत्तीसगढ़ देश का अकेला ऐसा राज्य है जहां किसानों को प्रति एकड़ धान पर 9 हजार रुपये और अन्य फसलों पर 10 हजार रुपये की इनपुट सब्सिडी मिलती है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति केंद्र सरकार की दुर्भावना इतनी ज्यादा है कि केंद्र के पास राज्यों को देने के लिए चावल का स्टॉक नही है. कर्नाटक सरकार ने केंद्र से 35 लाख मेट्रिक टन चावल की मांगा. उसके लिए कर्नाटक सरकार भुगतान भी करती, लेकिन केंद्र ने स्टॉक नही होने की बात कहते हुए चावल देने से मना कर दिया. इसी तरह केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ से इस साल 86 लाख मेट्रिक टन चावल लेने का एमओयू करती है, लेकिन बाद में केंद्र सरकार इस एमओयू से चावल लेने की मात्रा घटाकर 61 लाख मेट्रिक टन कर देती है. यह छत्तीसगढ़ के साथ दुर्भावना नही तो क्या है ? उन्होंने कहा कि केंद्र भले ही एक दाना चावल नही खरीदे लेकिन कांग्रेस सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों का दाना दाना खरीदेगी. उन्होंने बताया कि इस साल भी कांग्रेस सरकार ने 20 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी का लक्ष्य रखा है. इस साल राज्य के किसानों से कांग्रेस सरकार 125 लाख मेट्रिक टन धान खरीदेगी. पत्रवार्ता के दौरान अखिल भारतीय कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष के साथ कांग्रेस के आदिवासी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवाजी राव मोघे, राष्ट्रीय कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य के. राजू, इंद्रावती बेसिन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजीव शर्मा, विधायक व संसदीय सचिव रेखचन्द जैन, महापौर सफिरा साहू, जिलाध्यक्ष सुशील मौर्य समेत अन्य कांग्रेसी भी मौजूद थे.