चेतन कापेवार, बीजापुर। कमीशनखोरी, भ्र्ष्टाचार और तानाशाही जैसे विपक्षी राजनीतिक दलों के आरोपों को खारिज करते जुबानी पलटवारकर रहे बीजापुर के विधायक एवं बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विक्रम मण्डावी पर पुनः एक बार राज्य युवा आयोग के सदस्य अजय सिंह ने गम्भीर आरोप मढ़ते विधायक की कार्यशैली को विवादित और कांग्रेस पार्टी के लिए आने वाले चुनाव में नुकसानदायक बताया है। दरअसल आज शनिवार को अजय ने बीजापुर के पत्रकार भवन में पत्रवार्ता आयोजित किया था। इस दौरान तल्ख लहजे में अपनी बात रखते अजय ने आरोप लगाया कि जिले के लाल पानी प्रभावितसमेत अंदरूनी इलाकों में साफ पानी की मुक्कमल व्यवस्था को लेकर 5 करोड़ से अधिक के स्वीकृत कार्य कमीशनखोरी की भेंट चढ़ गए। सोलर ड्यूल पम्प, सोलर लाइट जैसे कार्यों में जमकर भ्र्ष्टाचार हुआ है। विधायक ने केशकाल के एक शख्स को इसका ठेका दे दिया, ठेकेदार ने मापदण्ड को ताक पर रख काम किया है, इस मामले को संगठन में रहते उन्होंने प्रभारी मंत्री की समीक्षा बैठक में उठाया था, लेकिन जब तक इसकी जांच होती उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।

उन्होंने बीजापुर स्थित महादेव तालाब का मुद्दा भी उठाया, जिसमे विपक्षी भाजपा के आरोपों को सही बताते बड़े पैमाने पर भ्र्ष्टाचार का आरोप लगाया।उनका कहना था अगर आरोप सही नही है तो महादेव तालाब में जहाँ निर्माण कार्य किये जा रहे लागत राशि और ठेकेदार का उल्लेख करता साइन बोर्ड लगवाया जाए। युवा आयोग सदस्य ने विधायक पर सागौन तस्करी में लिप्त पाए गए पशु चिकित्सा अधिकारी को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया। मामले में विधायक के उस बयान पर चुटकी लेते जिसमे विधायक कह रहे थे कि सीएम पूरे मामले को लेकर गम्भीर है, अजय ने कहा कि विधायक के इस बयान के बाद आरोपी अफसर लल्लन सिंह विधायक बंगला पहुँचने लगे, जिसके बाद ना तो जांच आगे बढ़ पाई है और ना ही कार्रवाई। ऐसे मामलों में अफसर के विरुद्ध बर्खास्तगी की कार्रवाई होनी चाहिए, जो विधायक के संरक्षण के चलते नही हो पाई।
वही विधायक के सोशल मीडिया में भ्र्ष्टाचार के आरोपों, खबरों को औचित्य हीन जैसे बयान पर कटाक्ष करते अजय ने कहा कि जब कांग्रेस विपक्ष में थी तब सोशल मीडिया ही उनका प्रमुख हथियार हुआ करता था, सोशल मीडिया पर भाजपा की कारगुजारियों को उजागर करते थे, तो आज यह कैसे औचित्यहीन हो गया।
अजय ने आगे कहा कि मुझे अफसोस नही कि मैं पार्टी से निष्कासित हूं, दुःख तो इस बात का कि कांग्रेस मुद्दों से भटक गई है। सत्त्ता की लालसा और अहंकार में अपने नेताओं को सच से अवगत नही करा रही है। इसलिए मुझे खुशी है कि मैं कांग्रेस का हिस्सा नही हूँ, चूंकि 15 साल संघर्ष करने के बाद, कार्यकर्ताओं की मेहनत की परिणति 21000 से अधिक मतों से हम विजयी हुए थे,फिर भी संघर्ष के दिनों में साथ देने वाले कार्यकर्ता उपेक्षित है, उनकी जगह चंद रोज पहले भाजपा से कांग्रेस आने वाले नकुल ठाकुर, बसन्त टाटी जैसे नेताओं को बड़े पदों से नवाजा जा रहा है।कार्यकर्ताओ का रोष सत्ता की वजह से शांत जरूर है, लेकिन मेरा परिवार जो घर टूटने की वजह से किराये के मकान में रहने मजबूर हुआ। जो शख्श बीजेपी के बैनर से राजनीति में आया, जिसने कांग्रेस में मेरी मदद से आगे अपनी छवि बनाई और विधायक तक का सफर किया, आज उस एहसान का कोई मोल नहीं बल्कि मुझे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। अजय का कहना था कि बीजापुर जिला कांग्रेस के नेताओं के विपक्ष के आरोपों पर पलटवार के बजाए आत्ममंथन की दरकार है, चूंकि पन्द्रह साल सत्त्ता में रही भाजपा अपना वजूद खो चुकी है लेकिन कांग्रेस भी सत्ता के अहंकार में वही गलती दोहराने की तैयारी में है।

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