सुकमा (नवीन कश्यप) – माओवादी विचारधारा से मोहभंग होने के बाद सीपीआई (माओवादी) पार्टी के दो शीर्ष कैडरों ने 7 दिसंबर 2025 को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. ये दोनों पति-पत्नी हैं और छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के रहने वाले हैं.
आत्मसमर्पण करने वाले कैडर
● दिरीदो विजजल उर्फ जयलाल: (साउथ सब-जोनल कमेटी मेंबर – SZCM, दरभा डिविजन)
● माडवी गंगी उर्फ विमला उर्फ भीमे: (डिविजनल कमेटी मेंबर – DVCM, दरभा डिविजन)
इन दोनों ने आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी), अमित बरदार, आईपीएस, और सुकमा जिला पुलिस (छत्तीसगढ़) के एएसपी रोहित शाह के समक्ष स्वेच्छा से आत्मसमर्पण किया.
प्रमुख पदों पर रहे और कई हिंसक वारदातों में शामिल
● दिरीदो विजजल उर्फ जयलाल (SZCM):
इन्होंने 1994 में बाल संगम से शुरुआत की और चार दशकों तक संगठन में सक्रिय रहे. ये कंपनी कमांडर और बाद में दरभा डिविजन के SZCM (साउथ सब-जोनल कमेटी मेंबर) और सैन्य प्रभारी के रूप में काम कर रहे थे. ये 07 घात लगाकर हमलों (Ambushes), 07 कैंप हमलों और छापों, 02 मुठभेड़ों (EOFs), 01 बैंक डकैती और छत्तीसगढ़ में 01 आईईडी विस्फोट जैसी गंभीर हिंसक घटनाओं में शामिल रहे हैं.
● माडवी गंगी उर्फ विमला उर्फ भीमे (DVCM):
वह 2006 में क्रांतिकारी गीतों से प्रेरित होकर माओवादी पार्टी में शामिल हुईं और पिछले 20 वर्षों से कार्यरत थीं. वह एसीएम और विभिन्न एरिया कमेटी सचिव (एसीएस) के रूप में कार्यरत रहीं, अंत तक मालेन्गर एसीएस के रूप में काम कर रही थीं. वह 07 मुठभेड़ों (EOFs) और छत्तीसगढ़ में कई अन्य अपराधों में शामिल रही हैं.
आत्मसमर्पण के मुख्य कारण
प्रेस नोट के अनुसार, इन दोनों माओवादी नेताओं ने निम्नलिखित कारणों से हथियार डालने का फैसला किया:
● पुलिस ऑपरेशन में वृद्धि: माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस शिविरों की स्थापना और लगातार अभियानों के कारण उनकी आवाजाही सीमित हो गई और उन्हें जान का डर सताने लगा.
● विचारधारा से मोहभंग: माओवादी विचारधारा पर से जनता का विश्वास घटना और पार्टी के सिद्धांतों से निराशा.
● शीर्ष कैडरों का नुकसान: छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में सुरक्षा बलों के साथ लगातार मुठभेड़ों (EOFs) के कारण कई शीर्ष माओवादी कैडर मारे गए, जिससे पार्टी की परिचालन क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई और माओवादियों के लिए अस्तित्व का संकट पैदा हो गया.
● पुनर्वास नीतियां: आंध्र प्रदेश सरकार की आकर्षक पुनर्वास नीतियों (जिसमें आत्मसमर्पण पर नकद इनाम, भूमि, नौकरी और अन्य लाभ शामिल हैं) और क्षेत्र में पुलिस-प्रायोजित रोजगार के अवसरों के प्रति जागरूकता ने उन्हें मुख्यधारा का जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया.
पुलिस अधीक्षक की अपील
एसपी अमित बरदार, आईपीएस, ने आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठाने, मुख्यधारा में शामिल होने और अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम करने का आश्वासन दिया.
उन्होंने यह भी अपील की कि जो लोग माओवादी पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे स्वेच्छा से निकटतम पुलिस स्टेशन पर आत्मसमर्पण करें या सीधे वरिष्ठ जिला पुलिस अधिकारियों से संपर्क करें.